Samvad lekhan in Hindi | संवाद लेखन, परिभाषा और उदाहरण

Samvad lekhan in Hindi | संवाद लेखन

Samvad lekhan:- इस आर्टिकल में हमने संवाद Samvad lekhan लेखन के बारे में जानकारी दी हैं, जैसा की आप जानते है, आपने अक्सर अपने दोस्तों से बातें की होंगी और मस्ती भी मारी होगी। और कभी-कभी फिल्मो के डायलॉग भी बोले होंगे और एक्टिंग भी करी होगी, पर उस वक्त आपको ये पता नहीं होता कि जो आप डायलॉग बोल रहे हैं उसे क्या कहते हैं?

Samvad lekhan in Hindi | संवाद लेखन, परिभाषा और उदाहरण

जो वार्तालाप आप मिलकर कर करते है, उसका मतलब क्या है? यह सब संवाद रचना होती है जिसके बारे में इस आर्टिकल में विस्तारपूर्वक दिया गया है| यह विषय अक्सर कक्षा दसवीं तक की परीक्षाओं में अधिकतर पूछा जाता है।

Samvad lekhan | संवाद लेखन की परिभाषा

संवाद लेखन हिंदी व्याकरण का एक अंग है, संवाद ‘वाद’ एक मूल शब्द है, और ‘सम्’ उपसर्ग दोनों शब्दों को जोड़ने से संवाद’ शब्द बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘बातचीत करना’ है। जब दो या दो से अधिक लोगो के बीच बातचीत होने वाले वार्तालाप को लिखा जाता है वह संवाद लेखन Samvad lekhan कहलाता है|

यह संवाद लेखन Samvad lekhan काल्पनिक और वास्तविक भी हो सकती है| क्यूंकि भाषा कई प्रकार की होती है| संवाद लेखन में इन बातों का भी ध्यान देना चाहिए जब वाक्य-रचना सजीव हो और भाषा सरल हो।

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संवाद लेखन (Samvad lekhan) कितने प्रकार का होता है?

संवाद लेखन चार प्रकार के होते हैं:

  1. सामान्य संवाद
  2. औपचारिक व्यापार संवाद
  3. विचारपूर्ण संवाद
  4. भावनात्मक संवाद

Samvad lekhan | संवाद लेखन के उदाहरण

1. ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने वाहन के चालक को रोक दिया क्योंकि आदमी ने हेलमेट नहीं पहना था। जानिए दोनों के बीच संवाद लेखन (Samvad lekhan)

पुलिसवाला:- तुम अच्छी तरह जानती हो कि बिना हेलमेट पहने गाड़ी चलाना अपराध है?

ड्राइवर:- अरे, अरे साहब! मैं कभी भी बिना हेलमेट पहने घर से बाहर नहीं निकलता लेकिन

पुलिसवाला:- तो आज आप किस खुशी में बिना हेलमेट के इस खूबसूरत बाइक को दर्शनीय स्थलों की सैर के लिए लेकर आए हैं।
ड्राइवर:- हां, मुझसे गलती हो गई।

पुलिसवाला:- गलती कर दो! यह छोटी सी गलती पूरी जिंदगी के लिए पेट का दर्द बना सकती है। मुझे आपका चालान करना है।

ड्राइवर:- अरे नहीं सर ! भविष्य में ऐसी गलती कभी नहीं होगी सर।

पुलिसवाला:- वादा करो।

ड्राइवर:- ज़रूर वादा करता हूँ।

2. जानिए रोगी और वैद्य के बीच का संवाद लेखन (Samvad lekhan)

रोगी :- वैद्यजी, नमस्कार!

वैद्य :– नमस्कार! आइए, पधारिए! कहिए, क्या हाल है ?

रोगी :– वैद्यजी अब थोड़ा अच्छा महसूस करता हूँ। मेरा बुखार अब उतर गया है, लकिन अभी खाँसी रह गयी है।

वैद्य :– कोई बात नहीं आप घबराइए नहीं। जल्द ही खाँसी भी दूर हो जायेगी। आज दूसरी दवा देता हूँ, आप जल्द ही अच्छे हो जायेंगे।

रोगी :– वैद्यजी आप ठीक कहते हैं, मेरा शरीर पहले से दुबला हो गया है। चला भी नहीं जाता और बिस्तर पर पड़े-पड़े तंग आ गया हूँ।

वैद्य :– अरे! चिंता की कोई बात नहीं बेटा, अगर अच्छे से ठीक होना है तो कुछ दिन और आराम कीजिए। सब ठीक हो जायेगा।

रोगी :– वैद्य जी कृपया खाने को बतायें, मुझे किया खाना चाहिए अब तो थोड़ी-थोड़ी भूख भी लगने लगी है।

वैद्य :– आप फल खूब खाइए बस खट्टे फलों से दूर रहना इनसे खाँसी बढ़ जाती है। दूध, खिचड़ी और मूँग की दाल खाइये|

रोगी :– ठीक है! वैसे आजकल गर्मी का मौसम चल रहा है तो प्यास बहुत लगती है। क्या शरबत पी सकता हूँ?

वैद्य :– नहीं आप शरबत की जगह दूध पिए आपके लिए वही अच्छा रहेगा। पानी भी आपको अधिक पीना चाहिए।

रोगी :– अच्छा, धन्यवाद! वैद्य जी कल फिर आऊँगा।

वैद्य :– अच्छा, नमस्कार।

3. दो छात्राओं के बीच का संवाद लेखन (Samvad lekhan)

पूजा:– क्या अभी तक सर नहीं आए?

कोमल:– इतनी जल्दी आते ही कब हैं !

पूजा:– हाँ रोज 10 मिनट लेट कर देते हैं।

कोमल:– और फिर आते ही शुरू हो जाते हैं की मेरी हर लाईन में क्वेश्चन होता है, बिल्कुल C.B.S.E. के पैटर्न जैसे

पूजा:– अच्छा ही है। हमें भी कुछ बातचीत का रोज-व-रोज अवसर मिल ही जाता है।

कोमल:– अच्छा, यह बताओ, तुम्हें मि० रमेश सर कैसे लगते हैं ?

पूजा:– हाँ वो तो बहुत ही अच्छे है। पढ़ाने लगते हैं तो तुरंत नींद आने लगती है।

कोमल:– अरे ! पागल मेरा मतलब मैं यह पूछ रही हूँ कि उनका Style आई मीन पढ़ाने की शैली कैसी है ? उनकी बात दिमाग में आती भी हैं कि नहीं ?

पूजा:– दिमाग में आए कहाँ से, पढ़ाते ही क्या हैं, दिमाग चाटते रहते हैं।

कोमल:– अरे! सर के बारे में ऐसे मत बोलो कही सुन लिया तो !

पूजा:– तो क्या में उनकी तरह बोलती फिरूँ कि मैं बड़ा विद्वान हूँ, मेरे पढ़ाए छात्र-छात्राएँ ऊँचे-ऊँचे पदों पर हैं, आदि-आदि……. ।

कोमल:– चुप, चुप वे आ रहे हैं।

4. सब्जीवाले और ग्राहक के बीच होने वाला संवाद (Samvad lekhan)

ग्राहक:– भाई मटर कैसे दिए है?

सब्जीवाला:– ले लो बाबू जी ! बहुत अच्छे मटर है, एकदम ताजा।

ग्राहक:– अरे ! भईया भाव तो बताओ।

सब्जीवाला:– वैसे तो पंद्रह रुपये किलो बेच रहे हैं पर आपसे बारह रुपये ही लेंगे।

ग्राहक:– अरे ! भाई बहुत महँगे है|

सब्जीवाला:– क्या बताएँ बाबूजी ! इस पूरी मण्डी में सब्जी के भाव आसमान छू रहे हैं।

ग्राहक:– फिर भी भईया कुछ तो कम करो।

सब्जीवाला:– चलो ! ठीक है आप एक रुपया कम दे देना बाबू जी ! कहिए कितने तोल दूँ ?

ग्राहक:– एक किलो मटर दे दो। और एक किलो आलू भी।

सब्जीवाला:– बाबू जी टमाटर भी ले लिए जिए, बहुत सस्ते हैं।

ग्राहक:– कैसे ?

सब्जीवाला:– लेलो बाबू जी ! तीन रुपये किलो दे रहा हूँ।

ग्राहक:– अच्छा ठीक है ! दे दीजिये आधा किलो टमाटर और दो नींबू भी डाल देना।

सब्जीवाला:– यह लो बाबू जी। ऑफर आपके लिए धनिया और हरी मिर्च भी रख दी है।

ग्राहक:– कितने पैसे हुए ?

सब्जीवाला:– सिर्फ इक्कीस रुपये।

ग्राहक:– लो भाई पैसे।

5. टिकट बाबू और यात्री के बीच होने वाला संवाद लेखन (Samvad lekhan)

टिकट बाबू:– भईया आप अपना टिकट दिखाइए जरा।

यात्री:– यह रहा टिकट !

टिकट बाबू:– भईया यह टिकट तो शोलापुर तक का ही था | लेकिन आप तो उससे एक स्टेशन आगे आगये हो।

यात्री:– एक स्टेशन आगे? तो क्या शोलापुर पीछे छूट गया?

टिकट बाबू:– जी हाँ, भईया शोलापुर तो पीछे रह गया।

यात्री:– भाई साहब ! अब यह तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई है?

टिकट बाबू:– आप कर क्या रहे थे?

यात्री:– जी! मेरी आँख लग गई थी।

टिकट बाबू:– आपको पहले से सचेत रहना चाहिए था। कहीं ऐसी भी गलती होती हैं?

यात्री:– भईया असल में मैं इस रास्ते से अनजान हूँ। मुझे नहीं पता था कि शोलापुर किस स्टेशन के बाद आता है, पहली बार आया हूँ|

टिकट बाबू:– ठीक है ! आप अगले स्टेशन पर उतर जाना और अब से इस बात का ध्यान जरूर रखना वरना आपको फाइन भरना पड़ेगा|

यात्री:– भला मैं ऐसा क्यों करूँगा? इससे तो मुझे ही परेशानी होगी।

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