दुर्गा पूजा पर निबंध | Essay On Durga Puja In Hindi

दुर्गा पूजा पर निबंध | Essay On Durga Puja In Hindi

नमस्ते, आज इस पोस्ट में बात करने वाले हैं 2023 में दुर्गा पूजा कब है और दुर्गा पूजा पर निबंध 2023 (Essay On Durga Puja In Hindi) के बारे में। इस लेख में मैं आपको दुर्गा पूजा पर निबंध अलग-अलग शब्दों में बताऊंगा जिसे पढ़ कर आप बहुत कुछ दुर्गा पूजा से संबंधित जानकारी जा सकते हैं। तो चलिए जानते हैं दुर्गा पूजा कब है और Essay On Durga Puja In Hindi 2023 के बारे में।

भारत एक विविधताओं का देश है, यहाँ पर सभी समुदाय के लोग निवास करते हैं। दुर्गा पूजा हिन्दुओं का बहुत ही पवित्र पर्व है, जिसे बुराई पर अच्छाई के जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इसे तो त्योहारों का राजा कहा जा सकता है।

दुर्गा पूजा को हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र और आश्विन महीनों में मनाया जाता है, लेकिन सबसे धूमधाम से इसे भारत के पूर्वी राज्यों जैसे कि पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखण्ड, और बिहार इत्यादि राज्यों में मनाया जाता है।

इस अवसर पर लोग बड़े धूमधाम से पूजा पंडाल बनाते हैं और मां दुर्गा की मूर्तियाँ स्थापित करके 9 दिनों तक पूजा करते हैं, कई लोग तो 9 दिन उपवास रखकर मां दुर्गा से आशीर्वाद, सुख, और समृद्धि प्राप्त करते हैं।

नवरात्री के दिन, दशमी के रूप में रावण का पुतला दहन किया जाता है, और इस मौके पर लोग मेलों, गीत-संगीत, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेते हैं। यह त्योहार एकता, समरसता, और सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करने का साक्षर माध्यम होता है, जो हमारे समाज के लिए महत्वपूर्ण है।

इस तरीके से, दुर्गा पूजा न केवल धार्मिक त्योहार होता है, बल्कि यह समाज में सामाजिक एकता की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और समाज को एक साथ लाने का काम करता है। इसके साथ ही, यह नारी शक्ति की महत्वपूर्ण प्रतीक भी है, जो हमारे समाज में महिलाओं के साथ समानता और सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करता है।

2023 में दुर्गा पूजा कब है – Durga Puja 2023 Date.

दुर्गा पूजा के बारे में निबंध (Essay On Durga Puja In Hindi) पढ़ने के बाद, आपको शायद यह जानकारी चाहिए कि 2023 में दुर्गा महा नवमी या दुर्गा पूजा कब है। 2022 की तारीख और मुहूर्त के साथ, हम दुर्गा पूजा के महत्वपूर्ण दिनों के बारे में भी चर्चा करेंगे। वैसे अगर आप गांव के रहने वाले हैं और आप जानना चाहते हैं गांव में पैसे कमाने के तरीके तो इस लेख को पढ़ सकते हैं।

महानवमी का महत्व –

महानवमी, दुर्गा पूजा के तीसरे और अंतिम दिन को मनाया जाता है। इस दिन का आरम्भ महास्नान और षोडशोपचार पूजा से होता है। महानवमी पर देवी दुर्गा की आराधना महिषासुर मर्दिनी के रूप में की जाती है, जिसमें उन्होंने असुर महिषासुर का वध किया था। इस दिन महानवमी पूजा, नवमी हवन, और दुर्गा बलिदान जैसी परंपराएँ भी निभाई जाती हैं।

समय और तारीख –

2023 में दुर्गा पूजा 15 अक्टूबर को शुरू होगी, 16:39:33 बजे से, और 24 अक्टूबर को 14:22:52 बजे नवमी के समापन के साथ समाप्त होगी। इस दिन मां दुर्गा की पूजा और आराधना उसके महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक आयोजन होंगे, जिनमें लोग भगवान के आगमन का स्वागत करेंगे और नारी शक्ति के महत्व को याद करेंगे।

दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता है | Durga Puja Kyu Manaya Jata Hai

दुर्गा पूजा हिन्दुओं का प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है, इस पर्व में माता दुर्गा की पूजा अर्चना की जाती है। सभी भक्त जन माता की पूजा, गीत, गान प्रेम-भाव से करते हैं। दुर्गा पूजा 10 दिनों का त्यौहार है, लेकिन दुर्गा माता की मूर्ति को 7वें दिन से पूजा की जाती है, आखिरी तीन दिन ही पूजा बड़े धूम-धाम से होती है। यह त्यौहार हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है।

पौराणिक कथा के अनुसार माँ दुर्गा ने महिषासुर के साथ 9 दिनों तक युद्ध किया था और इस युद्ध की याद में नवरात्रि मनाई जाती है। दुर्गा पूजा के समय भारत देश अनेकों जगहों पर धूम-धाम से मनाई जाती है।

दुर्गा पूजा के समय को नवरात्रि कहा जाता है, और यह त्योहार भारत के हर शहर और गांव में मनाया जाता है। इस पूजा को बुराई के ऊपर अच्छाई के जीत के याद में मनाया जाता है। यह पूजा नारी शक्ति के सम्मान के लिए मनाई जाती है और इसे श्रीरामचंद्र जी की विजय और माँ दुर्गा के महिषासुर के खिलाफ युद्ध की जीत के रूप में भी माना जाता है। दुर्गा पूजा के समय भारत देश विभिन्न प्रकार के पंडाल बनाता है और उन्हें काफी सुंदरता से सजाता है।

इस पर्व को अलग-अलग जगहों पर विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है, डांडिया खेला जाता है, नाच गाना होता है, और लोग माँ दुर्गा के भक्ति में डूब जाते हैं। दुर्गा पूजा पूरे हिंदुस्तान में होती है, लेकिन सबसे धूम-धाम से बंगाल, बिहार, झारखण्ड, और उत्तर प्रदेश में मनाई जाती है, विशेषकर छात्र और पढ़े-लिखे लोगों के बीच।

दुर्गा पूजा कब मनाया जाता है | Durga Puja Kab Manaya Jata Hai

दुर्गा पूजा हिन्दू धर्म का एक बहुत ही पवित्र त्यौहार है, जिसे बुराई पर अच्छाई के प्रतिक के रूप में मनाया जाता है। यह त्यौहार हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष के दिन शुरू होती है और अश्विन शुक्ल माह पक्ष की दशमी तिथि को इसका समापन होता है। 2022 में, दुर्गा पूजा की शुरुआत 26 सितंबर को हो रही है और इसका समापन 5 अक्टूबर 2022 को विजयदशमी मनाने के साथ हो जाएगा।

भारत एक विविधताओं का देश है, और यहाँ पर सभी समुदाय के लोग निवास करते हैं। दुर्गा पूजा हिन्दुओं का बहुत ही पवित्र पर्व है, जिसे बुराई पर अच्छाई के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

दुर्गा पूजा को पूरे भारत में हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है, परंतु इसका मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखण्ड, बिहार आदि पूर्वी राज्यों में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। खासकर पश्चिम बंगाल में यह त्योहार मुख्य होता है और लोग इसे बड़े उत्साह से मनाते हैं।

इस अवसर पर, लोग बड़े धूमधाम से पूजा पंडाल बनाते हैं और मां दुर्गा की मूर्तियाँ स्थापित करके 9 दिनों तक पूजा करते हैं। कई लोग 9 दिन उपवास रखते हैं और मां दुर्गा से आशीर्वाद और सुख-समृद्धि प्राप्त करते हैं। नवरात्री के अंत में, रावण का पुतला दहन किया जाता है और लोग मेलों, गीत-संगीत, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेते हैं।

इस त्योहार के माध्यम से हम अच्छी के विजय का संदेश देते हैं और नारी शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका को प्रमोट करते हैं। दुर्गा पूजा न केवल एक धार्मिक त्योहार है, बल्कि यह हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है, जो हमें एकता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है।

दुर्गा पूजा कैसे मनाया जाता है | Durga Puja Kaise Manaya Jata Hai

नवरात्री, हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, देवी शक्ति की नौ रूपों की पूजा के नौ दिनों के त्योहार के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर लोग उपवास करते हैं और नौ दिनों तक देवी के रूपों की पूजा आराधना करते हैं। वे वैदिक मंत्रों के साथ देवी की मूर्तियों का आराधना करते हैं और इन दिनों में आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

नवरात्री के इन दिनों, खासकर सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी के दिन, भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मां दुर्गा के पाट को सप्तमी के दिन खोलने की प्रक्रिया अद्वितीय होती है और श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का अवसर प्राप्त होता है। इसी अवसर पर बड़े शहरों में पंडाल बनाए जाते हैं, जो कुछ महीने पहले से ही तैयारी की जाती है। इन पंडालों की सजावट और आलंब करने का ढंग खास होता है और इन्हें देखने का आनंद उन्हें देता है।

नवरात्री के इन दिनों, लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेते हैं। मेले, मीणा बाजार, और अन्य रंगीन गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं। बच्चे से लेकर बूढ़े तक सभी इन मेलों का आनंद लेते हैं और खुशियों में खो जाते हैं। विजयदशमी के दिन रावण वध के साथ ही इस महापर्व का समापन होता है। फिर अगले दिन, श्रद्धालुओं के द्वारका माता दुर्गा को विदाई देने का अवसर आता है, और वे उनकी मूर्तियों को पानी में विसर्जित कर देते हैं।

दुर्गा पूजा का महत्व | Durga Puja Ka Mahatav

दुर्गा पूजा भारतीय संस्कृति में एक प्रमुख हिन्दू त्योहार है और यह अग्रणी रूप से मनाया जाता है। इस त्योहार का महत्व धार्मिक, सांस्कृतिक, और सामाजिक दृष्टिकोण से बहुत उच्च होता है, और यह मां दुर्गा की पूजा और महाकाली रूप की आराधना के माध्यम से देवी शक्ति की महत्वपूर्ण प्रतीक होता है।

1. धार्मिक महत्व – दुर्गा पूजा नवरात्रि के दौरान मनाया जाता है, जो नौ दिनों तक चलता है और देवी दुर्गा की नौ रूपों की पूजा का अवसर प्रदान करता है। इसके दौरान, लोग देवी का आराधना करते हैं, वैदिक मंत्रों का पाठ करते हैं, और अपने जीवन में मां दुर्गा के आशीर्वाद का आग्रह प्राप्त करते हैं। यह त्योहार धार्मिकता के माध्यम से आत्मा की शुद्धि और साधना की भावना को प्रोत्साहित करता है।

2. सांस्कृतिक महत्व – दुर्गा पूजा एक सांस्कृतिक महत्वपूर्ण त्योहार है जिसमें विभिन्न प्रकार की कला, संगीत, और नृत्य का प्रदर्शन किया जाता है। यह त्योहार सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देता है और लोगों को सांस्कृतिक महत्व की पहचान कराता है। बच्चे से लेकर वयस्क तक सभी लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेते हैं और इसका हिस्सा बनते हैं।

3. सामाजिक महत्व – दुर्गा पूजा समाज में एकता, समरसता, और सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करता है। यह त्योहार लोगों को एक साथ आने का मौका देता है और समाज में एकत्रित होने का संदेश देता है। लोग समुदाय के सदस्यों के साथ मिलकर पंडाल सजाते हैं, पूजा की आयोजना करते हैं, और एक-दूसरे के साथ उत्सव मनाते हैं। इसके अलावा, दुर्गा पूजा नारी शक्ति का सम्मान करता है और महिलाओं को समाज में समर्थन और सम्मान का अवसर प्रदान करता है।

इस तरह से, दुर्गा पूजा एक धार्मिक, सांस्कृतिक, और सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है और यह समाज में सद्गुणों को प्रोत्साहित करता है और लोगों को धार्मिक और सां

दुर्गा पूजा पर निबंध 300 शब्दों में – Essay On Durga Puja In Hindi.

तो ऊपर की जानकारियों को पढ़ने के बाद आपको पता लग गया होगा कि हमारे भारत का सबसे खास पर दुर्गा पूजा हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है. अब हम लोग दुर्गा पूजा से संबंधित कुछ निबंध को पढ़ेंगे, अगर आप दुर्गा पूजा पर निबंध ढूंढ रहे हैं वह भी 300 शब्दों में तो मैं आपको दोस्ती निबंध दुर्गा पूजा पर बताने वाला हूं जिसे आपको जरूर पढ़ना चाहिए.

परिचय.

दुर्गा पूजा, हिन्दुओं के बीच प्रसिद्धतम त्योहारों में से एक है। इसे दशमी, विजयादशमी, और नवरात्री पूजा भी कहा जाता है। यह त्योहार उत्तर भारत में विशेष धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर मां दुर्गा की पूजा और आराधना की जाती है, और यह पूजा दस दिनों तक चलती है। इसकी शुरुआत आश्विन के शुक्ल पक्ष की आरंभ से होती है, और विभिन्न स्थानों पर भक्तजन कलश स्थापित करके मां दुर्गा की पूजा करते हैं। इस अवसर पर रोज़ दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है, और बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी खुश रहते हैं।

उत्सव.

दुर्गा पूजा दस दिनों तक चलती है, जिसमें सप्तमी, आष्टमी, और नवमी को विशेष महत्व दिया जाता है। कुछ स्थलों पर कलश स्थापित करके मां दुर्गा की पूजा का आयोजन होता है। गांवों और शहरों में दुर्गा माता की प्रतिमाएं या मूर्तियाँ आकर्षक ढंग से सजाई जाती हैं। तीन दिनों तक भीड़ बड़ी होती है, और बच्चे खुशियों में बसे रहते हैं, नए नए कपड़े पहनकर मेले में घूमते हैं। मेलों में विभिन्न प्रकार के खेल और तमाशे होते हैं, जिनमें सबका मनोरंजन होता है। इस तरह दुर्गा पूजा का महोत्सव समाप्त हो जाता है।

इतिहास.

इस त्योहार के पीछे कई प्राचीन कथाएं जुड़ी हैं। एक कथा के अनुसार, दशहरा का शब्दिक अर्थ “दस हारा” होता है, और इस दिन भगवान राम ने दस मुख वाले रावण को मारा था, जो मां दुर्गा की आराधना के बाद हुआ था। यही कारण है कि दुर्गा पूजा का अयोजन हर साल दशहरा के दिन किया जाता है। कुछ लोग इसे महिषासुर नामक दैत्य दानव के वध के अवसर के रूप में मानते हैं, और इस उपलक्ष में दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है।

दुर्गा पूजा पर निबंध 500 शब्दों में. | Essay On Durga Puja In Hindi

नीचे दुर्गा पूजा पर 500 शब्दों में निबंध लिखा गया है कृपया जरूर पढ़ें.

परिचय.

दुर्गापूजा को दशहरा, विजयदशमी और नवरात्री भी कहा जाता है। यह हिन्दू धर्म का एक प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण त्योहार है, जो मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और बंगाल में धूमधाम से मनाया जाता है। इसके अलावा, दुर्गा पूजा को भारत के अन्य क्षेत्रों में भी मनाया जाता है।

महत्व.

दुर्गापूजा का आरंभ कब हुआ, इसके संबंध में अनेक मत हैं, लेकिन एक प्रमुख कथा के अनुसार, श्रीरामचंद्र जी ने दशहरा के दिन रावण पर विजय प्राप्त की थी, जिसके बाद यह त्योहार मनाया जाता है। दूसरी कथा के अनुसार, मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध किया और इस दिन से यह पर्व मनाया जाता है। चाहे कोई भी कथा हो, यह स्पष्ट है कि दुर्गापूजा के इस त्योहार में सत्य की विजय और असत्य की पराजय का संदेश होता है, और लोग आपसी एकता और सहयोग का महत्व समझते हैं।

पूजा की तैयारी.

दुर्गापूजा की तैयारी आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रारंभिक दिनों में की जाती है। कलश स्थापना के साथ ही पूजा की शुरुआत होती है, और इसके बाद यह पूजा दशमी तक चलती है। सप्तमी, अष्टमी, और नवमी को विशेष धूमधाम के साथ पूजा की जाती है। दसमी को यज्ञ का समापन होता है। यह दिन बड़े शुभ माना जाता है और इसके माध्यम से भारतीय परिवारों में नए कामों की शुरुआत की जाती है।

सामाजिक महत्व और उपसंहार.

दुर्गापूजा का सामाजिक महत्व यह है कि इसे एकता, समरसता और सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करने में मदद करता है। यह त्योहार लोगों को साझा काम करने के लिए प्रोत्साहित करता है और समाज में एकता की भावना को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, यह त्योहार कला, संगीत और सांस्कृतिक प्रदर्शन को बढ़ावा देता है। दुर्गापूजा के दौरान, लोग नाच-गाने करते हैं, नृत्य और संगीत का आनंद लेते हैं, और आपसी मिलनसर के दौरान खुशी और उत्सव का आनंद लेते हैं।

समापनस्वरूप, दुर्गापूजा न केवल एक धार्मिक त्योहार है, बल्कि यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव है जो सत्य की विजय, असत्य की पराजय, और सामाजिक सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका को प्रकट करता है। इस त्योहार के माध्यम से, हम नारी शक्ति का सम्मान करते हैं, समाज में एकता को बढ़ावा देते हैं, और सभी को आपसी सादगी के साथ जीने का संदेश देते हैं।

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दुर्गा पूजा पर निबंध 10 लाइन – Essay On Durga Puja In Hindi 10 Lines.
  • दुर्गा पूजा का आयोजन अश्विन माह के शुक्ल पक्ष के दिन से शुरू होता है और अश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर समाप्त होता है।

  • यह हिन्दू धर्म का एक प्रमुख पर्व है जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

  • माँ दुर्गा ने महिषासुर नामक असुर का वध नौ दिन और रात के युद्ध में किया था।

  • भगवान राम ने रावण का वध करने से पहले माँ दुर्गा की पूजा और आराधना की और उनके आशीर्वाद प्राप्त किये थे।

  • सप्तमी के दिन माँ दुर्गा का पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोलने का विधान होता है और इस अवसर पर गीत, संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, मेलों इत्यादि का आयोजन किया जाता है।

  • दशमी के दिन रावण का वध होता है, जिसे विजयदशमी के रूप में भी जाना जाता है।

  • माँ दुर्गा को नौ दिन तक पूजा की जाती है और फिर विजयदशमी के बाद पानी में विसर्जित कर दिया जाता है।

  • पश्चिम बंगाल में इस अवसर पर सिंदूर का खेल आयोजित किया जाता है और माँ दुर्गा से फिर आने की आग्रह की जाती है।

  • दुर्गा पूजा भारत में स्त्रियों के सम्मान को बढ़ावा देता है.

  • इस त्योहार में दुर्गा मां की शक्ति और महत्व का मान्यता है.

  • दुर्गोत्सव के पर्व में दसवें दिन दशहरा या विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है.

  • दुर्गा पूजा को अच्छाई पर बुराई के जीत के उपलक्ष में मनाते हैं.

निष्कर्ष.

दुर्गा पूजा को वास्तव में शक्ति प्राप्त करने की इच्छा से किया जाता है, जिससे विश्व की बुराइयों का नाश किया जा सके। दुर्गा पूजा बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में मनाई जाती है। उसी तरह से, जैसे कि देवी दुर्गा ने सभी देवी-देवताओं की शक्ति को इकट्ठा करके दुष्ट राक्षस महिषासुर का नाश किया था और धर्म को बचाया था, हमें भी अपनी बुराइयों पर विजय प्राप्त करके मानवता को आगे बढ़ाने का संकेत है। दुर्गा पूजा का यही संदेश होता है। देवी दुर्गा को शक्ति का अवतार माना जाता है। शक्ति-पूजा से लोगों में साहस का संचार होता है और वे आपसी वैर-भावों को भूलकर एक-दूसरे की मंगल-कामना करते हैं।

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